सुन्दर गुलाब का फूल
समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया हे कि रिश्ते ही नहीं हो पा रहे है, आप इस उदाहरण से शायद अच्छे से समझ पाये
एक युवती के परिजन एक संत के पास अपनी जिज्ञासा लेकर पहुंचे वह बोले-"महाराज! अपनी बेटी का विवाह करना चाहते हें हमने अनेक युवको को देख भी लिया है , परन्तु अभी तक कोई सबसे योग्य युवक नहीं मिला!
"संत बोले-बेटे! तुम पहले फूलो के बगीचे मे से सबसे सुन्दर गुलाब का फूल तोड़कर लाओ,लेकिन शर्त यह है की एक बार आगे बढ़ने के बाद पीछे नहीं मुड़ना!"
थोड़ी देर बाद वह परिवार खाली हाथ लोटा ! संत ने पूंछा- तुम्हे कोई सुन्दर फूल नहीं मिला..??"
वह बोले- "महाराज हम अच्छे-से-अच्छे फूल की चाहत मे आगे बढती गये मार्ग मैं अनेक सुन्दर फूल दिखे, परन्तु मैं इस चाहत में आगे बढती गई की आगे और भी सुन्दर फूल होंगें! दुर्भाग्यवश अंत में फिर मुरझाये फूल मिले!
संत बोले- ! जीवन भी इसी प्रकार है ! सबसे योग्य की तलाश में भटकते रहोगे तो जो संभव है, फिर पलट कर आओगे तो उससे भी हाथ धो बैठोगे उम्र गुजरते देर नहीं लगती! इसलिए जो प्राप्त हो सकता है, उसी में संतोष करने की प्रवृति पैदा करो! यही संभव समाधान है"