समाजसेवा का डिजिटल रोग

 समाजसेवा का डिजिटल रोग


आजकल समाज सेवा का एक नया अध्याय शुरू हो गया है 

एक Whatsapp ग्रुप बनाओ कुछ फुर्सतियो को जोड़ लो 

फिर उन्हे कहो की कुछ और फुर्सतियो मनचलो को जोड़ ले जो कि इधर उधर से आया हुआ विषय हीन कचरा ग्रुप मे पोस्ट कर सके और अन्य साथियो को ग्रुप के लिंक भेज सके 

फिर रोज किसी को पकड़कर उसकी टाँग खींचो 

सप्ताह में एक आध दिन ग्रुप में गाली गलोच करने वाला भी जरूरी है 

फेसबुक से जन्‍मदिन या सालगिरह का पता लगाकर सुबह से ही बधाई का तांता लगा लो 

कुछ नकलची शायर और गुड मॉर्निंग गुड नाइट वाले भी जरूरी है 

और इस तरह ग्रुप पे ग्रुप बनाते जाओ और बन गए समाज सेवी

है ना आसान

अब आते हैं काम की बात पर 

यदि आप भी किसी ऐसे ही ग्रुप में जुड़े हुए हैं तो एडमिन से ग्रुप के विषय के बारे में पूछे और संतोषजनक उत्तर ना मिलने पर रिपोर्ट स्पैम करके तुरंत निकल जाए

अब आप पूछेंगे कि बड़ी मुश्किल से तो किसी ने जोड़ा है और हम निकल जाए 

हाँ 

तुरंत निकलिए, नहीं निकले तो आप स्वयं का समय, सामर्थ्य और शक्ति का अपव्यय ही करेंगे 

बाकी आप समझदार हैं 
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